भोपाल में COVID-19 से मौतों पर चौंकाने वाला खुलासा

भोपाल में COVID-19 से मौतों पर चौंकाने वाला खुलासा

भोपाल में COVID-19 से मौतों पर कमेटी ने सौंपी ऑडिट रिपोर्ट, हुआ चौंकाने वाला खुलासा।


मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी की गई रिपोर्ट में ये बताया गया है कि अस्पताल में भर्ती होने के तीन घंटे के अंदर 23 फीसदी कोरोना संक्रमित मरीजों को मृत घोषित कर दिया गया

भोपाल. कोरोनावायरस (COVID-19) के कारण भोपाल (Bhopal) में मौत के बढ़ते आंकड़े को देखकर कलेक्टर के निर्देश पर गठित टीम ने चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की है. ऑडिट में ये खुलासा किया गया है कि भोपाल में मरने वाले पांच में से एक व्यक्ति में कोई बीमारी नहीं थी. दरअसल, भोपाल में कोरोना से हुई मौत (Corona Virus Death) का ऑडिट करने के लिये कलेक्टर के निर्देश पर तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया था. इस टीम को राजधानी भोपाल में हुई मौत के कारणों की जांच कर सरकार को रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

*कमेटी की रिपोर्ट में खुलासा* 

रिपोर्ट के मुताबिक बिना किसी बीमारी के जो मरीज अस्पताल में एडमिट हैं, वो भर्ती होने के 37 घंटे के बाद दम तोड़ते जा रहे हैं. जो मरीज कोरोना पॉजिटिव हैं उनकी अस्पताल में भर्ती होने के 63 घंटे के अंदर मौत हो जा रही है. ऑडिट की रिपोर्ट के हिसाब से जिन में कोई बीमारी नहीं है उन्हें भी कोरोना से बचकर रहने की जरूरत बताई गई है. ऑडिट की रिपोर्ट में बताया गया है जिनमें कोई बीमारी नहीं है उन्हें वायरस लगने के पांचवे दिन हॉस्पिटलाइज कराया गया. ऑडिट के नतीजों से पता चलता है कि जिन कोरोना संक्रमित मरीजों में पहले से कोई बीमारी थी या कोई मेडिकल समस्या चल रही थी वो लोग अस्पताल में भर्ती होने के लगभग 63 घंटे के अंदर हौसला हार गए. स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पताल में भर्ती होने के तीन घंटे के अंदर 23 फीसदी मरीजों को मृत घोषित कर दिया गया. जिससे विभिन्न गैस संगठन समुदायों में मौत के कारणों की निगरानी और मामले का पता लगाने का एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठा. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो ये ऑडिट बताता है कि जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी नहीं है, उन्हें भी कोरोनावायरस के लक्षणों के प्रति काफी सतर्क रहने की जरूरत है.

 *कोरोनावायरस की ऑडिट रिपोर्ट* 

कोरोनावायरस ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार दो मरीजों को अस्थमा था, 34 में से 12 को हाई बीपी था, तीन में ऑन्कोलॉजिकल स्थितियां थीं, दो में उम्र संबंधित मुद्दे थे, सात को क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज थी, एक व्यक्ति को तपेदिक (टीबी) था, एक में न्यूरोलॉजिकल मुद्दे थे और तीन मामलों में हृदय संबंधी समस्याएं थीं.