सिंचाई और पेयजल के लिए महत्वपूर्ण है केन बेतवा लिंक परियोजना - मुख्यमंत्री श्री चौहान

सिंचाई और पेयजल के लिए महत्वपूर्ण है केन बेतवा लिंक परियोजना - मुख्यमंत्री श्री चौहान

प्रदेश की 6 लाख 53 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में होगी बेहतर सिंचाईपरियोजना की शीघ्र पूर्णता के लिए प्रधानमंत्री से भेंट करेंगे मुख्यमंत्री                                         श्री चौहान

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि केन बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना प्रदेश के पिछड़े और सूखाग्रस्त क्षेत्रों को सिंचित करने और पेयजल उपलब्ध कराने की दृष्टि से महत्वाकांक्षी योजना है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नदी जोड़ो अभियान के अनुक्रम में विकसित की गई इस परियोजना से मध्यप्रदेश में 6 लाख 53 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में बेहतर सिंचाई संभव होगी। श्री चौहान ने कहा कि परियोजना की शीघ्र पूर्णता के लिये वे जल्द ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री से भेंट करेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर उनकी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ से आज दूरभाष पर चर्चा हुई है। उत्तर प्रदेश के जल संसाधन मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह शीघ्र मध्य प्रदेश आएंगे तथा यहां के जल संसाधन मंत्री से चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री केन बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना की बैठक को संबोधित कर रहे थे। जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट वीडियो कान्फ्रेंस द्वारा बैठक में सम्मिलित हुए। मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस तथा संबंधित अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
बैठक में जानकारी दी गई कि परियोजना के संबंध में अगस्त 2005 में एम.ओ.यू. हुआ था। इसके तहत 90 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार व्यय करेगी। राज्य सरकार का हिस्सा 10 प्रतिशत रहेगा। केन बेसिन में 4.47 लाख हेक्टेयर मध्यप्रदेश का तथा 2.27 लाख हेक्टेयर उत्तरप्रदेश का कृषि योग्य सिंचित क्षेत्र लाभन्वित होगा। बेतवा बेसिन से मध्यप्रदेश के 2 लाख 6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ मिलेगा। परियोजना से उत्पन्न होने वाली बिजली का संपूर्ण उपयोग मध्यप्रदेश द्वारा किया जाएगा। परियोजना की कुल लागत 35 हजार 111 करोड़ रूपये आंकलित की गई है। एम.ओ.यू. द्वारा उत्तरप्रदेश को केन कछार से 1700 मिलियन घन मीटर पानी आवंटित किया गया है जिस पर दोनों राज्यों की सहमति थी। इसमें रबी सीजन के लिए 547 मिलियन घन मीटर तथा खरीफ सीजन में 1153 मिलियन घन मीटर जल का आवंटन होना था, परंतु उत्तर प्रदेश द्वारा बाद में पानी की मांग बढ़ा दी गई।
भारत सरकार द्वारा परियोजना के सीजनल जल आवंटन के लिए अप्रैल 2018 में आयोजित बैठक में मध्यप्रदेश द्वारा रबी सीजन में सिंचाई एवं पीने के पानी के लिए बांध से 547 मिलियन घन मीटर के स्थान पर 700 मिलियन घन मीटर पानी उत्तर प्रदेश को आवंटित करने पर सहमति दी गई। लेकिन केंद्र द्वारा उत्तरप्रदेश को 788 मिलियन घन मीटर पानी आवंटित किया गया। उत्तरप्रदेश द्वारा जुलाई 2019 में पुन: मांग बढ़ा कर 930 मिलियन घन मीटर आवंटन का अनुरोध किया गया है। भारत सरकार द्वारा नवंबर से मई तक की जल आवश्यकता की तर्कसंगता जांचने का दायित्व राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण को सौंपा गया है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट को उत्तरप्रदेश के जल संसाधन मंत्री से बातचीत कर परियोजना की शीघ्र पूर्णता के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के लिए कहा है।