ट्रांसपोर्टरों के लॉकडाउन से थम गए लाखों ट्रकों के पहिए,फल और सब्जी की सप्लाई पर पड़ेगा असर

ट्रांसपोर्टरों के लॉकडाउन से थम गए लाखों ट्रकों के पहिए,फल और सब्जी की सप्लाई पर पड़ेगा असर

भोपाल। कोरोनाकाल में पहले लॉकडाउन और फिर पेट्रोल डीजल के दामों में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी से नाराज होकर मध्यप्रदेश के ट्रांसपोर्टर 3 दिन की संकेतिक हड़ताल पर चले गए है। हड़ताल पर जाने से प्रदेश में 6 लाख से अधिक ट्रकों के पहिए आधी रात से थम गए है वहीं बाहर के राज्यों से आने वाले ट्रकों की भी प्रदेश में एंट्री पर बैन लग गया है। अपनी मांगों को लेकर त्योहारों से ठीक पहले ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन 12 अगस्त तक तीन दिन की संकेतिक हड़ताल का एलान किया है। इंदौर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सीएल मुकाती कहते हैं कि कोरोना के चलते लगे लंबे लॉकडाउन के कारण ट्रांसपोर्टर बुरी तरह टूट चुके है ऐसे में डीजल के दामों में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी और अवैध वसूली ने पूरे व्यवसाय की कमर तोड़ दी है। ट्रांसपोर्ट व्यापार की लागत बढ़ने पर आम जनता की जेब पर सीधा भार पड़ता है। अगर प्रदेश में डीजल के दामों में कमी की जाती है तो निश्चित ही लोगों को राहत मिलेगी और कोरोना काल के कारण डूबते हुए ट्रांसफर व्यापार को भी जीवनदान भी मिल पाएगा।
      उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान ट्रांसपोर्टरों और ट्रक चालकों की ओर दिलाने के लिए तीन दिनों को लॉकडाउन (चक्का जाम) किया जा रहा है, उन्होंने आम जनता
और किसानों से भी हड़ताल का समर्थन करने की अपील की है।

ट्रांसपोर्टरों की प्रमुख मांग -
1- डीजल के दामों में हो रही बेतहाशा मूल्य वृद्धि पर अंकुश लगाया जाए।
2- कोविड 19 (कोरोना) की वजह
से व्यावसायिक वाहनों के पहिए पूर्णतः रुक गए थे, बावजूद इसके राज्य सरकार को रोड टैक्स, गुड्स टैक्स तो चाहिए ही साथ ही उस पर पेनाल्टी भी चाहिए। देश के विभिन्न राज्यों ने कोरोना काल मे व्यावसायिक वाहनों को रोड टैक्स, गुड्स टैक्स से छूट दे दी है।
3- कोरोना काल में ट्रक चालक लगातार आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति में लगे है, ऐसे में ट्रक चालकों को कोरोना योद्धा मानते हुए उनको भी बीमा सुरक्षा कवच मिलना चाहिए।
4- मध्यप्रदेश की समस्त परिवहन चौकियों पर हो रही अवैध वसूली को तुरंत प्रभाव से बंद कराया जाए।