आज आवश्यकता है बेसहारा बच्चों को सवारने की

आज आवश्यकता है बेसहारा बच्चों को सवारने की


जिस समाज में पशुओं से लेकर इंसानों तक के बच्चों के प्रति एक अत्यंत सुकोमल भावना हर एक में रहती है।


समाज में जब हम सड़कों पर घूमते अनाथ बेसहारा बच्चों को देखते हैं तो मन पीड़ा से भर उठता है। यह बेसहारा बच्चे जिन्हें स्ट्रीट चिल्ड्रन कहकर पुकारा जाता है । यूनिसेफ के मुताबिक 18 वर्ष से कम उम्र के वे सभी बच्चे यह बच्चियां जिनके लिए सड़क रेलवे प्लेटफार्म ही उनका आसरा बन गए हैं इन बेसहारा बच्चों को प्यार देने के लिए मां-बाप नहीं है ।


या है तो जीवन की अन्य समस्याओं में उलझे हुए हैं ऐसे बच्चे अनेकों तरह से दुरुपयोग उपेक्षा एवं शोषण के शिकार बनते जाते हैं । विभिन्न तरह के गिरोह की चपेट में आकर इनका बचपन से  बुरी आदतें के पनपने के हाथ चल जाते हैं । 


एक तरह उनका जीवन शुरू होने से पहले ही एक त्रासदी और यंत्रणा में बदल जाता है उक्त बात मानव एकता संघ की आयोजित बैठक में संस्था के संस्थापक कमल सिंह रघुवंशी ने युवा वर्ग को संबोधित करते हुए कही और कहा कि इन बेसहारा बच्चों में कुछ को सड़कों पर कुछ को रेलवे स्टेशन पर या सार्वजनिक पार्कों में रहते देखा जा सकता है ।


इनमें से प्रत्येक बच्चे अनाथ हो यह जरूरी नहीं इनमें से कईयों के परिवार भी होते हैं परिवार की अपनी आर्थिक सामाजिक परेशानियों के कारण अपने घरों से बाहर निकाल दिया जाता है अथवा बच्चे स्वयं ही विभिन्न कारणों के अपने घरों को नहीं लौटना चाहते बेसहारा बच्चों की सुध लेने वाला कोई नहीं है । 



देश प्रदेश में बहुत सी योजनाएं ऐसी हैं जिनका कोई औचित्य नहीं हैं सिवाय पैसा बर्बाद करना है
अपने आसपास में अगर आप बेसहारा बच्चों को देखें तो उनके लिए हर संभव प्रयास कर उनका सहयोग करें। 

ठंड का मौसम आ गया है जितना हो सके उनके पहनने के लिए  गर्म कपड़े उन्हें गिफ्ट करें, जूते मोजे गिफ्ट करें, खाने की चीजें गिफ्ट करें।  इससे आपके धन में कोई कमी नहीं आएगी 
आपके पापों का प्रायश्चित होगा आपकी उम्र बढ़ेगी और धन में वृद्धि होगी