जन्म से लेकर ग्रेजुएशन तक बेटियों का खर्च उठाने की स्कीम में ऑनलाइन अप्लाई करें


  • बिहार में कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने, समाज और परिवार में लड़कियों-बेटियों के आर्थिक योगदान में वृद्धि स्कीम में अप्लाई अब ऑनलाइन भी किया जा सकता है. मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना में बेटियों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए उनके जन्म से लेकर ग्रेजुएशन तक का खर्च सरकार उठाती है.

मुजफ्फरपुर. बिहार सरकार की ओर से मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना को रफ्तार देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य में कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने, समाज और परिवार में लड़कियों - बेटियों के आर्थिक योगदान में वृद्धि के लिए ये नई पहल की गई है. इस पहल के तहत बेटियों के परिजन मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के लिए घर बैठ कर ही ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. विभाग ने कोरोना वायरस को मद्देनजर रखते हुए यह प्रक्रिया शुरू की है.

इस प्रक्रिया के अंतर्गत जन्म से लेकर दो साल तक की कन्याओं को लाभ प्रदान करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाएंगे. आवेदन करते समय पूछी गई सभी जरूरी जानकारी देनी होगी. इसके साथ ही कन्या से संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र और सेविका का नाम भी दर्ज कराना होगा. आवेदन के लिए कन्या का जन्म प्रमाण पत्र और मां के साथ खिंची तस्वीर को भी अपलोड करना होगा. इस प्रक्रिया के बाद ही अभिभावकों को योजना का लाभ मिल सकेगा. 


इस विशेष मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के अंतर्गत कन्या के जन्म पर 2000 रुपए की राशि दी जाएगी. एक साल का होने और आधार पंजीकरण कराने पर 1000 रुपए, कन्या के 2 वर्ष के होने और पूर्ण टीकाकरण होने पर 2000 रुपये, कक्षा 1 से 2 प्रतिवर्ष पोशाक के लिए 600 रुपये, कक्षा 3 से 5 प्रतिवर्ष पोशाक के लिए 700 रुपये, कक्षा 6 से 8 प्रतिवर्ष पोशाक के लिए 1000 रुपये, कक्षा 9 से 12 प्रतिवर्ष पोशाक के लिए 1500 रुपये की राशि प्रदान की जाएगी.


इसी के साथ लड़कियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सैनेटरी नैपकिन के लिए 300 रुपये और बारहवीं कक्षा पास करने पर 1 हजार रुपये, स्नातक डिग्री हासिल करने पर 25 हजार रुपये की राशि दी जाएगी.


राज्य में कन्या भ्रूण हत्या को लेकर पहले भी कई कदम उठाए जा चुके हैं. योजना के बारे में डीपीओ ने बताया कि मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या को रोकना, लड़कियों का जन्म निबंधन व संपूर्ण टीकाकरण, लिंग अनुपात में वृद्धि, शिशु मृत्यु दर में कमी, बालिका शिक्षा को बढ़ावा, बाल-विवाह पर अंकुश, प्रजनन दर में कमी, आत्मनिर्भर बनाना, सम्मानपूर्वक जीवन-यापन, परिवार-समाज में लड़कियों के आर्थिक योगदान बढ़ाना है.