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    छतरपुर के बक्सवाह जंगल काटने का एस यू सी आई (कम्युनिस्ट) पार्टी ने किया विरोध

    Congress Comrade Pratap Samal of Socialist Unit Center of India Madhya Pradesh
    सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया कम्युनिस्ट पार्टी के मध्य प्रदेश सचिव कॉमरेड प्रताप सामल

    छतरपुर
    । मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की बस्कवाह जंगल को काटे जाने के संबंध में सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया कम्युनिस्ट के मध्य प्रदेश सचिव कामरेड  प्रताप सामल के द्वारा अपने बयान में कहा गया कि मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा छतरपुर जिले की बस्कवाह क्षेत्र में आदित्य बिरला की ऐस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी को हीरों की खदान के लिए हजारों साल पुराना 382 . 131 हेक्टेयर जंगल खत्म कर दो लाख 75 हजार 875 पेड़ काटने की अनुमति दे दी है।

    हाल ही में इसी कोरोनाकाल में मध्य प्रदेश के सीहोर के एक किसान पर एक पेड़ काटने की एवज में एक करोड़ से अधिक का मुआवजा देने का दंड कोर्ट के द्वारा दिया गया था, उसमें कोर्ट की टिप्पणी थी कि ऑक्सीजन देने वाला पेड़ अमूल्य है। इसी तरह 13 फरवरी 2019 में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा आदिवासियों के द्वारा जंगल को नुकसान पहुंचाया जा रहा है इस तरह की याचिका के फैसले के रूप में 20 लाख आदिवासियों को जंगल से बेदखल कर देने का फैसला दिया था । 

    लेकिन आज इतनी आसानी से 2 लाख 75 हजार से अधिक पेड़ों को, एक पूरे जंगल को काटने की इजाजत दी जा रही है । क्योंकि उसके साथ पूंजीपतियो का मुनाफा जुड़ा हुआ है । इस प्रोजेक्ट में कुल 300 से 400 लोगों को (अधिकारी, कर्मचारी, मजदूर सहित ) रोजगार मिलने की बात कही जा रही है । किंतु इससे होने वाली हानि इस लाभ की तुलना में हजारों गुना अधिक है।

    इस प्रोजेक्ट क्षेत्र के आसपास 20 गांव है।
    20 गांव और उनमें रहने वाले 8000 लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी अनदेखा कर दिया गया है। यह पानी की कमी वाला क्षेत्र है जहां पीने के पानी का संकट बना रहता है। माइनिंग के लिए बड़े मात्रा में पानी की जरूरत होगी जिससे संकट और अधिक गहरा जाएगा । इतना ही नहीं माइनिंग और अयस्क की सफाई के दौरान अपनाई जाने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं से दूषित जल भूमि और जल को प्रदूषित कर देगा और जल पीने योग्य नहीं रहेगा। इस क्षेत्र का एक मात्र अस्पताल और  सेकेंडरी स्कूल बक्सवाहा में ही पड़ता है।  

    पशु पालन इस क्षेत्र का रोजगार का बड़ा साधन है जो कि जंगल पर निर्भर होकर ही चल रहा है। इस क्षेत्र के गरीब लोग सीजन पर महुआ के फल और बीज इकट्ठा करते हैं और तेंदू के पत्ता इकट्ठा करते हैं यह उनकी आजीविका का एक  साधन है ।

    सरकार इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के हित की अनदेखी कर रही है जो कि अन्याय पूर्ण है।  पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से आज जंगलो का संरक्षण और अधिक पेड़ लगाने की आवश्यकता है क्योंकि जंगलों की इसी प्रकार होती आ रही अनाप-शनाप कटाई से हर प्रकार का प्रदूषण बढ़ा है और ग्लोबल वार्मिंग भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है।

    बक्सवाहा प्रोजेक्ट जनहितकारी प्रोजेक्ट नहीं है । एक पूंजीपति के व्यक्तिगत लाभ के लिए आमजन के जीवन और पर्यावरण की इतनी बड़ी हानि को स्वीकार नहीं किया जा सकता है ।  इसलिए  हम सरकार से मांग करते हैं कि  सरकार इस प्रोजेक्ट को रद्द करे। पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए आम जनता के हित की बलि चढ़ाना बंद करे।
    जनहित में....

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